Tuesday, December 21, 2021

छंद वर्ण के आँगन गूँजे : छंद रस अलंकार की अमूल्य निधि - समीक्षक कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'

छंद वर्ण के आँगन गूँजे : छंद रस अलंकार की अमूल्य निधि - समीक्षक कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'
पुस्तक  "छंद वर्ण के आँगन गूँजे"  लेखक श्री संजय कौशिक विज्ञात जी।
आदरणीय विज्ञात जी की पुस्तक की समीक्षा कर सके इतना सामर्थ्य मेरी लेखनी में नहीं है पर पुस्तक पढ़कर उसके बारे में लिखने से स्वयं को नहीं रोक पाई ,चाहे पाठक इसे समीक्षा कहें चाहे मेरा पुस्तक के प्रति अनुराग।
कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा' 

छंद शास्त्र के पुरोधा, मनिषी, विज्ञ, मुर्धन्य हस्ताक्षर, श्री संजय कौशिक विज्ञात जी किसी परिचय के अपेक्षीत नहीं है।

उनके चरित्रगत गुण-
कर्मठता, दृढ़ निश्चय, हिन्दी भाषा के उपासक, प्रज्ञ, मेधावी, साहित्य समर्पित जीवन किसी से छुपे नहीं हैं।
हिन्दी भाषा के उत्थान और छंदों के पुनरुत्थान में उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया है।
इसी सोपान पर "छंद वर्ण के आँगन गूँजे"  पुस्तक आदरणीय संजय कौशिक विज्ञात जी द्वारा रचित ऐसा सृजन है जो छंद शास्त्र साहित्य के लिए अमूल्य धरोहर है।
इस  पुस्तक का अवतरण आदरणीय विज्ञात जी की श्रम साध्यता, प्रतिबद्धता, और अतुल्य ज्ञान कोष का परिणाम है।
उनकी अकिंचन्यता का एक उदाहरण - उन्होंने अपने सभी नवीन आविष्कृत 106 छंदों को अपने गुरु पिता-माता कुछ परिजन और बाकी अपने शिष्य शिष्याओं के नाम से नाम देकर उन्हें अपने मंच एंव शिक्षार्थियों को समर्पित कर दिए हैं ।

आपकी इस पुस्तक में हिंदी साहित्य के प्राचीन छंदों के साथ-साथ नवीन आविष्कृत छंदों के शिल्पों की बारिकी को सरल और सहज गति में विस्तार से उदाहरण सहित समझाया गया है ,सवैया शिल्प विधान और उनके रससिक्त उदाहरण, उनकी कल्पना शक्ति, देश और देश के सुरभित संस्कारों पर लिखे सवैयों की छटा देखते ही बनती है।
सुखी सवैया का एक अनुपम उदाहरण---

विधी का यह श्रेष्ठ विधान दिखे, ये देश दिखे अपना नित पावन।
सब हैं ऋतुएँ बस्ती जिसमें, यह हिन्द महान लगे मन भावन।
जब प्रीत बढ़े वह भी ऋतु है, कहते हम हैं जिसको सावन।
शुभ हैं गणना कहते वह भी,अपनी सुन ले सब एक इकावन।

साथ ही इस पुस्तक में लोक छंद, छंदों पर उनके शोध और नवीन अविष्कार किये गये छंद एंव उपजाति सवैया पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।

काव्य जगत के लिए ये पुस्तक एक अमूल्य पुरस्कार है।

यह पुस्तक नवांकुरों के लिए साक्षात माँ शारदा का वरदान है।
इस में छंदों के शिल्प, मात्राभार रस,अलंकार और काव्य सृजन की समस्त विशेषताओं पर गहनता से प्रकाश डाला गया है और जो सभी एक ही जगह पर सरलता से स्थापित किए गये हैं।
पुस्तक सभी 11 रसों के साथ-साथ अलंकारों पर विस्तृत व्याख्यात्मक लेखा है, जो छंद लिखना सीखने वालों के लिए 
संजीवनी साबित होगा।

उनके द्वारा सृजित विशुद्ध हिंदी के सभी उदाहरण चमत्कृत करते हैं,उनकी भाषा का सौंदर्य बोध उनके उदाहरणों में सजीव हो उठा है, अलंकृत शब्द शक्ति स्वयं उनके लेखन का आभूषण है। 
उनकी ये पुस्तक गागर में सागर संजोने का अनुपम उदाहरण है।

अपनी छोटी "सुसंबद्ध "पुस्तक में उन्होंने एक ग्रंथ जैसी वृहद गठी हुई जानकारियांँ भर दी हैं।
जिस को पढ़कर हर कलमकार , शोधकर्ता, साहित्य कार, नवांकुर लाभ उठा कर काव्य लेखन में पारंगत हो सकता है।

"छंद वर्ण के आँगन गूँजे" 
काव्य अनुरागियों के लिए एक अमूल्य कृति है सीखने और सँवरने के इच्छुक साहित्य कारों को यह संग्रह अवश्य पढ़ना चाहिए।

यदि एक पंक्ति में कहूँ तो महत्व की दृष्टि से यह पुस्तक लेखकों के लिए और साहित्य के नवांकुरों के लिए बहुत ही लाभकारी है। 
प्रारंभ से लेकर अंत तक पुस्तक को पढ़ने के पश्चात बहुत सारी महत्वपूर्ण जानकारियों मिलेंगी और नवीन लेखकों को सम्पूर्ण दिशा निर्देश मिलेगा।
आदरणीय संजय कौशिक विज्ञात जी की ये पुस्तक समय का अमिट हस्ताक्षर है। 
मैं इस अमूल्य कृति के लिए आदरणीय संजय कौशिक विज्ञात जी को अनंत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करती हूंँ।छंद वर्णन के आँगन गूँजे यहाँ से क्रय करें

उनकी इस पुस्तक की सफलता तो निश्चित है ही, ये पुस्तक सफलता के नये आयाम स्थापित करें।
पुनः बधाई एवं शुभकामनाएं 🌷🌷

कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा' 
मुम्बई महाराष्ट्र

16 comments:

  1. छन्द वर्ण के आँगन गूंजे , लेखकों के लिए गुरुदेव जी का यह एक अनुपम संग्रह (उपहार) है ।बहुत ही उपयोगी पुस्तक चरण वंदन गुरुदेव को🙏🙏🙏

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  2. गुरुदेव का प्रत्येक संग्रह अपने आप में नवीनता लिए होता है पर "छंद वर्ण के आँगन गूँजे" उन सभी से अलग बहुत सारा ज्ञान समेटे हुए प्रस्तुत हुआ जिसे पढ़ना प्रत्येक कलमकार के लिए स्वयं को निखारने जैसा है। निःसंदेह संग्रह जितना अनुपम है कुसुमजी की समीक्षा भी उतनी ही मनभावन लगी। अतुकांत कविता हो या छंद हर विधा पर कुसुमजी की पकड़ बहुत अच्छी है। शब्द-शब्द पकड़ कर मर्म तक पहुंचने में कुशल एक आदर्श पाठिका की समीक्षा पढ़ना बहुत अच्छा लगा। वो मेरी प्रिय कवयित्री हैं और गुरुदेव मेरे आदर्श ....दोनों को अनंत बधाई और शुभकामनाएँ...यह संग्रह अपार सफलता प्राप्त करे 💐💐💐

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  3. एक अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक संग्रह की बहुत ही बेहतरीन एवं सटीक समीक्षा👏👏👏👏

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  4. एक अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक छन्द संग्रह के प्रति उत्कृष्ट अनुराग से पूर्ण समीक्षा
    दोनो ही अति मनभावन है
    गुरुदेब को सादर नमन और कुसुम जी को हार्दिक बधाई

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  5. किसी भी संग्रह का धरातल पर अवतरण आज के समय में कोई क्लिष्ट कार्य नहीं रह गया है अब भारत वर्ष के प्रकाशनों की संख्या लाखों की संख्या पार कर चुकी है ऐसे में इन पुस्तकों का औचित्य तथा सार्थकता साहित्यिक मतों द्वारा समीक्षा तथा आलोचना से ही ज्ञात किया जा सकता है। कलम की सुगंध छंदशाला छंदों की कार्यशाला परिवार आदेशित करता रहा और मेरी लेखनी नित चलती रही सीखने सीखाने की परम्परा को निभाते-निभाते कब यह संग्रह निर्मित हुआ और कब धरातल पर अवतरित हुआ पता ही न चला। सच पूछो तो इस संग्रह का भान मुझे उस दिन हुआ जब लोकार्पण से पूर्व ही प्रथम संस्करण की सभी पुस्तकें विक्रय हो गई थी और लोकार्पण कार्यक्रम दूसरे संस्करण की प्रतीक्षा देखने लगा ..परिवार का यह स्नेह भी अविस्मरणीय है जो मेरी लेखनी को गतिमान रखता है। "छंद वर्ण के आँगन गूँजे" छंद एवं रसों का यह संग्रह वर्षों की साधना का परिणाम आप सभी विद्वत जनों को सौंपते हुए मुझे बहुत हर्ष की अनुभूति हो रही है समीक्षक के रूप में आदरणीया कुसुम कोठारी जी ने जितने सुंदर ढंग से निष्पक्षता रखी है इसके लिए आदरणीया कुसुम कोठारी जी का आत्मीय आभार प्रकट कर लेखनी को विराम देता हूँ .... और अपेक्षा है कि समूचे भारत वर्ष से अन्यत्र समीक्षक लेखक कवि कवयित्री भी इस संग्रह पर अपनी समीक्षकीय प्रतिक्रिया अवश्य दें ....
    संजय कौशिक 'विज्ञात'

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  6. बहुत सुंदर अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक छंद संग्रह सुन्दर समीक्षा अतिमनभावन क्या कहने नतमस्तक हूं नमन है आदरणीय गुरुदेव आपको और आपकी मेहनत खूबसूरत छंद को और समीक्षा के लिए हमारी कुसुम दी प्रणाम आपको

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  7. सारगर्भित समीक्षा दीदी! आपने गुरुदेव की लेखनी और उनके व्यक्तित्व दोनों का ही उत्तम शब्दों में वर्णन किया है। जैसे ही भारत आऊँगी, अवश्य यह पुस्तक मँगवा कर पढ़ूँगी। साथ ही में आपकी व अन्य साथियों की पुस्तकें भी।

    सादर, गीतांजलि 🙏🏼

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  8. गुरुदेव की लेखनी को नमन,उनकी लेखनी अपने आप में धरोहर है।छंद विधा में गहरी पैठ रखती है गुरुदेव की लेखनी। कुसुम कोठारी जी का समीक्षा सोने पर सुहागा।
    अद्भुत अप्रतिम सृजन एवं समीक्षा ‌

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  9. बहुत सारगर्भित वर्णन

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  10. आदरणीय गुरुदेव एवं उनकी लेखनी को शत -शत नमन प्रणाम 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
    आदरणीया कुसुम दीदी द्वारा की गई समीक्षा बहुत सुंदर 👌🙏

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  11. कसी हुई समीक्षा और पुस्तक की विशेषताओं से अवगत कराती अद्भुत समीक्षा के लिए आ.कुसुम कोठारी जी को अनंत शुभकामनाएँ।
    गुरुदेव जी के विलक्षण कृति के लिए उन्हें बधाई।

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  12. अतुल्य कृति की अनुपम समीक्षा , सादर नमन🙏🙏

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  13. सुंदर सराहनीय समीक्षा अनंत शुभकामनाएं

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  14. रोचकता और उत्‍सुकता जगाती सार‍गर्भित समीक्षा प्रस्‍तुति
    हार्दिक शुभकामनाएं विज्ञात जी को और आपको

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  15. सार्थक और सारगर्भित समीक्षा। बधाई और आभार।

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  16. ज्ञानवर्धक छन्द संग्रह की सराहनीय समीक्षा।
    आदरणीय विज्ञात जी और आदरणीया कुसुम दी को हार्दिक बधाई।
    सादर

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